
धार्मिक आयोजनों के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश: सिसवा बाजार का भव्य दुर्गा पूजा महोत्सव
- By UP Samachaar Plus --
- Wednesday 09 Oct, 2024
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सिसवा बाजार, महराजगंज। पिछले 30 वर्षों से सिसवा बाजार में श्री बाल दुर्गा पूजा सेवा समिति द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव ने धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को जीवंत करने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश देने का भी कार्य किया है। इस वर्ष 2024 में समिति ने महिष्मति 2 की तर्ज पर 125 फीट ऊंचे भव्य पंडाल का निर्माण किया, जिसने श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना दिया। इस आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज को सुधारने के कई संदेश भी समाहित किए गए हैं।
इस वर्ष दुर्गा पूजा महोत्सव की शुरुआत मातारानी के भव्य दरबार से हुई, जिसे कलकत्ता के प्रसिद्ध पूजा पंडालों की शैली में सजाया गया है। मां दुर्गा का दिव्य स्वरूप न केवल अद्भुत शांति और सौंदर्य का प्रतीक है, बल्कि आध्यात्मिक आनंद का भी स्रोत है। श्रद्धालु इस झांकी को देखने के बाद एक गहरी आस्था और भक्ति से अभिभूत हो जाते हैं। यहां आने वाले भक्तों का कहना है कि मां का यह स्वरूप उन्हें न केवल शांति का अनुभव कराता है, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी भर देता है।
भगवान श्रीकृष्ण और अर्धनारीश्वर की झांकियां
दूसरी प्रमुख झांकी भगवान श्रीकृष्ण की है, जिसमें उन्हें कालिया नाग का मर्दन करते हुए दिखाया गया है। यह झांकी विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके साथ ही, भगवान शिव और माता पार्वती की मिश्रित प्रतिमा, जिसे अर्धनारीश्वर के रूप में जाना जाता है, भक्तों के मन में भक्ति और आस्था का संचार करती है।
शक्ति की देवी महाकाली का रौद्र रूप, जिसमें वे रक्तबीज का संहार कर रही हैं, पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित किया गया है। यह झांकी शक्ति और साहस का प्रतीक है और महिलाओं के प्रति समाज के दृष्टिकोण को बदलने का आह्वान करती है। इन झांकियों का दर्शन भक्तों को धार्मिक अनुभव में डुबो देता है, जिससे वे अपनी आस्था को और मजबूत महसूस करते हैं।
तिरुपति बालाजी का भव्य दरबार
तीसरी भव्य झांकी में ऊंचे पहाड़ों पर तिरुपति बालाजी का दरबार सजाया गया है। भगवान बालाजी के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं के लिए यह एक अद्वितीय अवसर है, जहां वे भगवान के दिव्य रूप का दर्शन कर सकते हैं। इस झांकी का निर्माण अत्यंत भव्य तरीके से किया गया है, जो भक्तों को पर्वतीय मंदिरों का अनुभव कराता है।
धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक जागरूकता
श्री बाल दुर्गा पूजा सेवा समिति का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को सुधारने और जागरूकता फैलाने का भी एक माध्यम है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी समिति ने दुर्गा पूजा महोत्सव के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया है। इस बार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक, जल संरक्षण, दहेज प्रथा के खिलाफ संदेश, वृद्धाश्रम की समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करने और वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर झांकियों और संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया।
समिति के अध्यक्ष का कहना है, "हम हर साल अपने धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ समाज में व्याप्त बुराइयों और कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता फैलाने का प्रयास करते हैं। इस वर्ष भी हमने विभिन्न झांकियों और संदेशों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का काम किया है। हमारी कोशिश है कि लोग न केवल धार्मिक आयोजनों का आनंद लें, बल्कि समाज में अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें।"
सामाजिक संदेशों की व्यापक गूंज
इस वर्ष के आयोजन में सबसे प्रमुख संदेश बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर केंद्रित था, जिसमें कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ कड़ा संदेश दिया गया। इसके साथ ही, जल और पर्यावरण संरक्षण पर भी समिति ने विशेष ध्यान दिया है। समिति के सदस्यों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान जब लोग बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं, तो यह सही समय होता है जब उन्हें सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से समिति ने दहेज प्रथा, वृद्धाश्रम, शिक्षा और पर्यावरण से संबंधित संदेशों को झांकियों में सम्मिलित किया।
दुर्गा पूजा महोत्सव में धार्मिक झांकियों के साथ-साथ कई सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन भी हो रहे हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक धरोहरों का सम्मान करने का संदेश दिया जा रहा है। समिति की यह पहल निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रही है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देता है, बल्कि लोगों को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक भी करता है।
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं का सैलाब
सिसवा बाजार का यह दुर्गा पूजा महोत्सव न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष की तरह इस बार भी भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है, जो इस भव्य आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित हुए हैं। आयोजन की भव्यता और सामाजिक जागरूकता की गूंज के चलते यह महोत्सव हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।
समिति की इस अनूठी पहल से समाज में जागरूकता और बदलाव की उम्मीदें बढ़ रही हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करने की यह कोशिश निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।